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धरती पुत्र - A Story of Laborious Farmer

धरती पुत्र - A Story of Laborious Farmer - TimesTak
धरती पुत्र - A Story of Laborious Farmer

धरती पुत्र - A Story of Laborious Farmer

मूंडरी गांव में एक किसान रहता है। जो बहुत गरीब होता है, उनके दो बच्चे भी होते हैं। एक दिन वो किसान अपनी खेत में खेती करने जाता है। ठंड का मौसम होता है और वो चाहता है कि सूर्य उगने के पहले अपने खेत में पानी छोड़ दे ताकि फ़सल की बुआई अच्छी तरह हो पाए। लेकिन जिस दिन वो पानी छोड़ने का फ़ैसला लेता है उस दिन उस किसान की नींद जल्दी नहीं खुलती है और सूर्य उदय हो जाता है। जब किसान की नींद खुलती है वो देखता है दिन हो आया है और सूर्य धूप देना आरम्भ भी कर चुका है।

वो बहुत मायूस हो जाता है लेकिन वो हर नहीं मानता और फिर दूसरे दिन पानी छोड़ने का फ़ैसला लेता है। दूसरे दिन भी वही होता है, किसान की नींद जल्दी नहीं खुलती है। जब वो नींद से जागता है तो वापस से देखता है दिन हो आया है। वो सोचने लगता है, पहले तो वो सूर्य उदय होने से पहले ही उठ कर खेतों में काम करने चला जाता था, पानी छोड़ देता था, बीज की बुआई भी कर देता था फिर अचानक इस बार उसकी नींद क्यों नहीं खुलती है। यही सोचते सोचते वो दोबरा सो जाता है। उधर उसके दोनों बेटे स्कूल से वापस आता है और देखता है उसके पिता खेत में काम नहीं करने गए हैं और घर पे ही सोए हैं, ऐसा क्यों? वो अपने पिता के पास पहुंचता है और उन्हें नींद से जगा कर पूछता है। पिता जी क्या हुआ? आप खेतों में  काम पर नहीं गए, और ऐसे दिन में सोए हैं? उनके पिता कहते है, बेटा मै हर रोज कोशिश करता हूं सुबह सूर्य उदय होने के पहले उठकर खेतों में चला जाऊँ और बीज की  बुआई करने हेतु खेतों में पानी छोड़ दू, लेकिन ऐसा कर नहीं पता मैं। 
हर सुबह कोशिश करता तो हूं लेकिन सुबह सूरयोदय के पहले मेरी नींद ही नहीं खुलती और जब नींद खुलती है तो देखता हूं दिन हो आया है। यही सोचते सोचते आज नींद आ गई। किसान के दोनों बेटे ध्यान से उनकी बात सुनते हैं और मन ही मन में सोचते हैं, उनके पिता को क्या हुआ है जो ऐसी बात कर रहें हैं। क्योंकि खेतों में तो बीज की बुआई भी हो चुकी है और पानी भी छोरा जा चुका है फिर ऐसा उनके पिता क्यों के रहे हैं। किसान के दोनों बेटे उन्हें बताते हैं कि पिताजी खेतों में तो बीज की बुआई पहले से हो रखी है और पानी भी छोरा हुआ है फिर आप किस खेत की बात कर रहे हैं? 

किसान ये बात सुनकर दंग और हैरान हो जाता है कि जब उसने बीज की बुआई की ही नहीं पानी छोरा ही नहीं फिर ऐसा कैसे हो गया। वो खेतों में जाता है और देखता है वाकई में खेतों में बीज की भी बुआई हो चुकी है और पानी भी छोरा जा चुका है।

उसे अपने आंखों पर विश्वास नहीं हो पाता है और वो यही बात सोचते सोचते घर वापस आ जाता है। रात हो जाती है और किसान अपने आंगन में खटिया लगा कर सो जाता है। आधी रात किसान को सपना आता है। वो देखता है एक विशालकाय रूप वाली देवी उनके समक्ष खड़ी हो जाती है, और देखते ही देखते अपने आशीर्वाद से किसान की सारी खेती का काम कर देती है। वो ये सपना देखते ही तुरंत उठ बैठता है और घबरा जाता है। वो उस देवी के बारे में सोचने लगता है, थोड़ी देर बाद अचानक एक विशाल चमक उस किसान के आंखों के सामने आता है और वो देखता है वहीं देवी जो किसान के सपने में आयी थी, उसके सामने साक्षात् प्रकट हो जाती है। किसान उस देवी को देख बड़ा आश्चर्य हो जाता है। 

वो उस देवी से पूछता है: हे देवी मां आप मेरे सपने में आकर मेरा सारा काम कर जाती हैं जो मुझे करना चाहिए था, खेतों में बीज डालना पानी छोरना ये काम तो मेरा था, फिर आप इस काम को क्यों करती हैं ?  

देवी कहती हैं: हे किसान तुम तो अन्नदाता हो जो अपनी मेहनत से सारी दुनिया को अनाज देता है, लेकिन तुमने कभी ख़ुद के लिए कुछ नहीं किया। तुम अपनी मेहनत से सारी फ़सल को हरा भरा करते हो। जिस दिन तुम खेतों में काम करते करते थक कर करहाने लगे थे और मां करके पुकार रहे थे उसी वक़्त मैंने तुम्हें आराम करने की आशीर्वाद देकर तुम्हे निंद्रा में भेज दिया और तुम्हारी सारी काम को मैंने संपूर्ण कर दिया।

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दुनियां में किसान भगवान् का दूसरा रूप होता है, जिसे हम अन्नदाता भी कहते हैं। जो अपनी कर्म के लिए अपनी सारी ज़िन्दगी न्योछावर कर देते हैं, अपनी खून पसीने से खेती करते है चाहे वो कितना भी थक कर चूर हो जाए लेकिन वो अन्नदाता मेहनत कर सारी दुनिया को अनाज पूर्ति करते हैैं ।

To be continued...

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